वर्तमान भारत के कृषि योग्य भूमि की उर्वरता बनाए रखना एक गंभीर समस्या का रूप ग्रहण करती जा रही है
परिणाम स्वरूप एवं पोषण सुरक्षा नागरिकों तक पहुंचाना एक गंभीर चुनौती बन गई है उच्च मृदा क्षरण, कम जैविक कार्बन एवं पोषक तत्व क्या समानता उदाहरण के तौर पर एनपीके औसत ( 7.7
.1: 1) भोजन की गुणवत्ता के स्तर में गिरावट ला रही है और परिणाम स्वरूप सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी कृषि भूमि में चुनौती बनी हुई है। 95% खाद्य पदार्थ कृषि योग्य भूमि से पैदा होते हैं और इस भूमि का संवर्धन बहुत आवश्यक हो गया है।

इन्हीं विषयों पर गंभीर परिचर्चा के लिए हाल ही में पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एक राउंड टेबल का आयोजन किया जिसका विषय
“खेत खुराक और सेहत ; Soil, Health and Nutrition” था ।
इस चर्चा में नीति निर्धारक, कृषि इंडस्ट्रीज के लीडर , कृषि वैज्ञानिक एवं कृषि विशेषज्ञ शामिल हुए/ इस परिचर्चा में मृदा स्वास्थ्य, फसलों की पोषण शक्ति और उसका आम जनता के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पर स्थित चर्चा हुई।
इस परिचर्चा का संदर्भ पीएचडी चैंबर की डिप्टी सेक्रेटरी जनरल डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने प्रस्तुत किया। स्वागत भाषण एन के अग्रवाल चेयरपर्सन ,केमिकल्स का प्लास्टिक कमेटी, पीएचडी चैंबर ऑफ़ कॉमर्स ने प्रस्तुत किया
और संचालन गायत्री शर्मा निर्देशक पी एचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स ने किया।
इस परिचर्चा के मुख्य अतिथि डॉक्टर पीके सिंह एग्रीकल्चर कमिश्नर कृषि मंत्रालय भारत सरकार ने उपस्थित गणमान्य अतिथियों के बीच कहां की भारत के कृषि का दृष्टिकोण की में बदलाव की सोच मुख्यत:
किसानों की सुरक्षा मृदा उर्वरता को सुदृढ़ करने और दीर्घकालिक निरंतर पर आधारित होना चाहिए ना की पूर्णत: उत्पादन प्राप्त करने में।
केंद्र सरकार राज्यों को सतत खेती मृदा स्वास्थ्य संवर्धन की ओर ध्यान देने की सलाह दे रहा है और समेकित प्रणाली संपूर्ण देश में अपनाना चाहिए जिसके मृदा की जैविकता, कार्बन मात्रा और व्यापक मृदा स्वास्थ्य राज्यों जो की ऊर्जा संवर्धन फसल विविधीकरण
जल संरक्षण एवं किसान केंद्रित पौधे को बढ़ावा दे जिस की दीर्घकालिक खाद एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित हो सके/
राउंड टेबल परिचर्चा के संदर्भ को आगे बढ़ते हुए पीएचडी चैंबर के डिप्टी सेक्रेटरी जनरल ने कहा कि भारत 351 मिलियन टन प्रत्येक वर्ष खाद्य अनाज उत्पादन करता है लेकिन फिर भी पोषण गंभीर हो सकता है की समस्या से जूझ
रहा है मृदा क्षरण के कारण नाइट्रोजन जिंक एवं आयरन की कमी को जन्म दे रहा है ।
NFH के आंकड़े बताते हैं की 35.5 प्रतिशत बच्चे अवरुद्ध विकास से ग्रसित हैं और 32.1 परसेंट कम वजन वाले पैदा हो रहे हैं जो यह बात के प्रति सचेत करता है कि अधिक उत्पादन ही भुखमरी को दूर नहीं कर सकता। उन्होंने आगे कहा कि इस पर चर्चा
जिसका शीर्षक खेत खुराक और सेहत है इसका मुख्य उद्देश्य सामूहिक प्रयासाे से चुनौतियों का सामना करना, सतत खेती , मृदा का संवर्धन और फसलों के उत्पादन में पोषणता को बढ़ावा देकर ही निपटा जा सकता है।
एनके अरोड़ा जो की KAKV फाउंडेशन के गवर्निंग काउंसिल के सेक्रेटरी हैं, ने अपनी प्रस्तुति भी इसी विषय पर रखी और फाउंडेशन ने शीर्षक सवाल हेल्थ, फूड प्रोडक्शन और फूड न्यूट्रिशन- एन एनालिसिस पर एक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की /
समापन एवं धन्यवाद प्रस्ताव आर जी अग्रवाल, चेयर Phd एग्री बिजनेस कमेटी ने की।
