

जलगांव, दि.12 प्रतिनिधि : श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमण संघ, जलगांव की वार्षिक सभा का आयोजन दिनांक 10 मई 2026 को जैन हिल्स में किया गया। सभा का शुभारंभ शासनपति भगवान महावीर स्वामीजी, पूज्य आचार्य सम्राट आनंदऋषीजी म.सा., वर्तमान आचार्य शिवमुनिजी म.सा. तथा युवाचार्य प्रवर पूज्य महेंद्रऋषीजी म.सा. को वंदन एवं सामूहिक नवकार महामंत्र के पाठ से हुआ।
सभा के प्रारंभ में देवलोकगमन हुई महासाध्वी वाणीभूषण पूज्य प्रीतिसुधाजी म.सा. तथा महासाध्वी पूज्य पद्मश्री डॉ. चंदनाजी म.सा. को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सभामंच पर जैन इरिगेशन सिस्टम्स लि. के अध्यक्ष अशोक जैन, पूर्व महापौर रमेशदादा जैन, पूर्व महापौर प्रदीप रायसोनी, तारादेवी रेदासनी, ताराबाई डाकलिया, ज्योति अशोक जैन, दिलीप चोपड़ा, अनिल कोठारी, शांतीलाल बिनायक्या तथा नंदलाल गादिया उपस्थित थे।
सभा में नई अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी का चयन किया गया। अशोक जैन के मार्गदर्शन में सर्वसम्मति से संध्या अश्विन कांकरिया को अध्यक्ष चुना गया। कार्यकारिणी में शांतीलाल बिनायक्या, नगरसेवक अमर जैन, संजीव मेहर, नंदलाल गादिया, सुनील ललवाणी, संदीप रेदासनी, रूपेश लुंकड, प्रवीण पगारिया, राजेंद्र पारख, दिनेश डाकलिया, अतुल जैन, महेंद्र लोढ़ा, जितेंद्र जांगड़ा, नरेंद्र सांडेचा, नरेंद्र कोठारी, दिनेश बोरा, नरेंद्र बंब, अजित कोठारी, सुनीता डाकलिया, डॉ. सोनाली जैन, सीए तेजल संघवी, तृप्ती रायसोनी, संगीता पारख, स्वीटी देसर्डा, अनिता कांकरिया, प्रदीप श्रीश्रीमाळ, बाबूशेठ श्रीश्रीमाळ, प्रवीण धाड़ीवाल, अनिल सिसोदिया तथा प्रियेश छाजेड़ का समावेश है।
संध्या कांकरिया ने पिछले वर्षभर में आयोजित विभिन्न उपक्रमों की विस्तृत जानकारी देते हुए अशोक जैन तथा प्रदीप रायसोनी द्वारा समय-समय पर मिले मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया। श्रमण संघ की नियमावली का वाचन दिलीप चोपड़ा ने किया। विभाग प्रमुखों के कार्यों की जानकारी एवं भविष्य की रणनीति पर रमण छाजेड़ ने अपने विचार व्यक्त किए। श्रमण संघ सदस्य डायरेक्टरी की जानकारी जितेंद्र कोठारी ने दी।
चौकट …
संगठनात्मक एकता महत्वपूर्ण – अशोक जैन
अपने मार्गदर्शनपर भाषण में अशोक जैन ने कहा कि समाज के सभी सदस्यों को एकजुट होकर धर्मसेवा, संतसेवा एवं संघसेवा के लिए सदैव आगे आना चाहिए। पद की अपेक्षा किए बिना समर्पणभाव से सेवा करना आवश्यक है। पिछले कार्यकाल के उपक्रमों को देखने पर स्पष्ट होता है कि एकता के बल पर कितने सुंदर कार्य किए जा सकते हैं। इस संगठनात्मक एकता को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि “संघ, समाज, संप्रदाय, गच्छ एवं संतवृंदों के बारे में गैरजिम्मेदाराना वक्तव्य नहीं करना चाहिए। यदि कोई सार्वजनिक रूप से ऐसा करता है तो उसे उसी स्थान पर रोकना हम सभी की जिम्मेदारी है। यही सच्चे अर्थों में संघहित और संघसेवा होगी।”
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