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जैन इरिगेशन द्वारा दुनिया के सबसे बड़े बायोचार का उद्घाटन

कृषि क्षेत्र की अग्रणी वैश्विक कंपनी जैन इरिगेशन ने लगभग 20,000 टन वार्षिक क्षमता वाले अत्याधुनिक औद्योगिक स्तर के बायोचार संयंत्र का शुभारंभ किया है

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June 4, 2026
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जलगांव, 3 जून (प्रतिनिधि): दुनिया की सबसे बड़ी माइक्रो-इरिगेशन (सूक्ष्म सिंचाई) प्रणाली प्रदाता और सतत कृषि क्षेत्र की अग्रणी वैश्विक कंपनी जैन इरिगेशन ने अपने साझेदारों के सहयोग से जलगांव में लगभग 20,000 टन वार्षिक क्षमता वाले अत्याधुनिक औद्योगिक स्तर के बायोचार संयंत्र का शुभारंभ किया है। यह परियोजना जलवायु-स्मार्ट कृषि, परिपत्र विनिर्माण (सर्कुलर मैन्युफैक्चरिंग) और व्यावसायिक स्तर पर कार्बन निष्कासन को बढ़ावा देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल है। इस अभिनव परियोजना की रूपरेखा और क्रियान्वयन के लिए जैन इरिगेशन ने वैश्विक विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम किया है।
प्रतिदिन 50 मीट्रिक टन से अधिक कृषि एवं फल प्रसंस्करण अवशेषों को संसाधित करने की क्षमता वाला यह जलगांव संयंत्र दुनिया के सबसे बड़े एकल बायोचार रिएक्टरों में से एक माना जाता है। इसके साथ ही वैश्विक बायोचार और कार्बन निष्कासन आंदोलन में भारत की भूमिका और अधिक मजबूत हुई है। जलगांव स्थित यह संयंत्र कई नियोजित बायोचार रिएक्टरों में पहला है तथा ऐसे कई अन्य संयंत्रों के विकास का कार्य जारी है।

बायोचार क्या है?
बायोचार एक कार्बन-समृद्ध, स्थिर और मिट्टी के लिए लाभकारी पदार्थ है। इसे कृषि अवशेषों को कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में गर्म करके (पायरोलिसिस प्रक्रिया के माध्यम से) तैयार किया जाता है। फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उन्हें बायोचार में परिवर्तित करने से कार्बन सैकड़ों वर्षों तक सुरक्षित रूप से संग्रहित रहता है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। इसी कारण बायोचार को कार्बन डाइऑक्साइड निष्कासन (सीडीआर) का सबसे विश्वसनीय और टिकाऊ विकल्प माना जाता है।

खेत से फिर खेत तक : परिपत्र अर्थव्यवस्था का आदर्श
इस परियोजना के तहत कृषि अवशेषों को मूल्यवान बायोचार में परिवर्तित कर पुनः किसानों के खेतों में उपयोग किया जाएगा। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, जल धारण क्षमता में सुधार होगा, जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि को बढ़ावा मिलेगा, किसानों को अतिरिक्त आय के स्रोत प्राप्त होंगे तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी।
जैन इरिगेशन का सूक्ष्म सिंचाई, पौधरोपण सामग्री, कृषि प्रसंस्करण और सौर ऊर्जा क्षेत्रों में मजबूत वितरण नेटवर्क बायोचार को सीधे किसानों तक पहुंचाने में सक्षम है। भारत में किसी अन्य बायोचार उत्पादक के पास इतनी मजबूत “लास्ट माइल” क्षमता उपलब्ध नहीं है।

भारत के लिए बड़ा अवसर
भारत में प्रतिवर्ष 50 करोड़ टन से अधिक कृषि अवशेष उत्पन्न होते हैं, जिनका एक बड़ा हिस्सा खुले में जला दिया जाता है। जैन इरिगेशन की यह परियोजना इस समस्या को आर्थिक अवसर में बदलने का काम करेगी।

परियोजना के लाभ
किसानों की दीर्घकालिक आय और उत्पादकता में वृद्धि
जैविक अवशेषों के संग्रहण, प्रसंस्करण और वितरण के क्षेत्र में ग्रामीण रोजगार सृजन
भारत की राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) को समर्थन
वैश्विक कार्बन बाजार में किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करना
यह परियोजना कार्बन क्रेडिट्स उत्पन्न कर सैकड़ों वर्षों तक कार्बन संग्रहण सुनिश्चित करती है। साथ ही पऱ्हाटी जलाने की घटनाओं को कम कर मिट्टी में जैविक कार्बन और जल उपयोग दक्षता को बढ़ाती है।

परियोजना की प्रमुख विशेषताएं
क्षमता: प्रतिदिन 50 टन से अधिक कृषि एवं फल प्रसंस्करण अवशेषों का प्रसंस्करण
वार्षिक प्रसंस्करण: लगभग 20,000 टन अवशेष
वैश्विक स्तर: दुनिया के सबसे बड़े एकल बायोचार रिएक्टरों में से एक
कार्बन निष्कासन: सैकड़ों वर्षों तक टिकाऊ कार्बन संग्रहण
किसान नेटवर्क: 120 से अधिक देशों में 1 करोड़ से अधिक किसानों तक जैन इरिगेशन की पहुंच।कोट…
“जैन इरिगेशन द्वारा स्थापित यह बड़े पैमाने का बायोचार संयंत्र कार्बन डाइऑक्साइड निष्कासन क्षेत्र में आवश्यक नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण है। एशिया की कृषि आधारित अर्थव्यवस्थाओं के लिए बायोचार अत्यंत उपयोगी है, क्योंकि यह मिट्टी के स्वास्थ्य, जल संरक्षण और उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में मदद करता है।”
अल्विन ली, हेड ऑफ सप्लाई, पुरो.अर्थ, ग्लोबल कार्बन रिमूवल रजिस्ट्री“ :
यह हमारे लिए गर्व और महत्व का क्षण है। ‘साझा मूल्य निर्माण’ का सिद्धांत हमेशा हमारे कार्यों के केंद्र में रहा है। यह परियोजना केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि मूल्य श्रृंखला की नई कल्पना है। कृषि अवशेषों को मूल्यवान संसाधन में बदलकर हम किसानों और अन्य सभी हितधारकों के लिए लाभकारी परिपत्र व्यवस्था का निर्माण कर रहे हैं।”
अनिल जैन, प्रबंध निदेशक, जैन इरिगेशन
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